आधुनिक कृषि, कम पानी, अधिक आय
आज का किसान मेहनती है, लेकिन तकनीक, बाज़ार और सुरक्षा से वंचित है। पानी की कमी और बढ़ती लागत ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। हम इसे आधुनिक तकनीक और निष्पक्ष बाज़ार व्यवस्था के माध्यम से बदलना चाहते हैं।
कृषि से जुड़ी अर्थव्यवस्था में अधिकतम दस प्रतिशत आबादी ही निर्भर हो, तब किसान को उसका सही मूल्य हासिल होगा, इस लक्ष्य पर कार्य करेंगे।
प्रशिक्षित युवा कृषि वैज्ञानिकों की सहायता से हर ग्राम पंचायत पर फोकस करेंगे और उन्हें एक स्वावलंबी आर्थिक इकाई बनाया जाएगा।
किसानों को नकद अनुदान के साथ साथ उच्च गुणवत्ता के संवर्धित बीज और आर्गेनिक उर्वरक निशुल्क उपलब्ध करानी होगी तथा उनके सही उपयोग के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आधुनिक कृषि तकनीक को विकसित किया जाएगा और कम पानी में अधिक उत्पादन के लिए विभिन्न आधुनिक सिंचाई प्रणाली को व्यापक रूप से लागू किया जाएगा।
किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसमें खेती, पशुपालन, डेयरी और अन्य सहायक गतिविधियाँ शामिल होंगी।
पशुपालन और डेयरी को कृषि के समान महत्व देते हुए आधुनिक डेयरी तकनीक को विकसित किया जाएगा।
हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक FPO (Farm Produce Organization) और एक OFPO (Off-Farm Produce Organization) की स्थापना की जाएगी।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए सहकारी उत्पादन और साझा संसाधन मॉडल विकसित किया जाएगा।
ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर स्वास्थ्यवर्धक और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा।
कृषि और ग्रामीण उत्पादों के लिए स्थानीय स्तर पर मार्केट प्लेस विकसित किए जाएंगे तथा उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को प्रोत्साहित किया जाएगा।
उद्यमी किसान किसान को अन्नदाता से उद्यमी बनाना। वे अपनी उपज की कीमत खुद तय करेंगे और अपने खेतों को किसी व्यापार की तरह मुनाफे के लिए चलाएंगे।
स्वावलंबी गाँव हर ग्रामीण इकाई को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना। स्थानीय स्तर पर धन सृजन होने से पलायन रुकेगा और भारतीय गाँवों की खुशहाली वापस लौटेगी।
सतत पारिस्थितिकी तंत्र एक रसायन मुक्त, सतत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण जहां मिट्टी की सेहत बहाल हो और कृषि के साथ-साथ जैव विविधता भी पनपे।
हम साथ मिलकर एक बेहतर, निष्पक्ष और अधिक समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
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