पीपल्स ग्रीन पार्टी एक नई पार्टी है जो भारत देश को पूरी तरह से आधुनिक और विकसित बनाने का स्वप्न लेकर बनी है। हम भारत में दुनिया की सबसे ईमानदार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित करना चाहते है। हम भारत को बेहतरीन मानव संसाधन सूचकांक स्तर, सर्वश्रेष्ठ मानवअधिकार और गौरवशाली नैतिक मूल्यों वाला राष्ट्र बनाना चाहते है। संपूर्ण विश्व के लिये ख़ुशहाली और बराबरी हमारा लक्ष्य है। एक भारत, मज़बूत भारत और श्रेष्ठ भारत हमारा एकमात्र धेय है।
पीपल्स ग्रीन पार्टी देश के हर नागरिक तक ये पाँच स्तंभ पहुँचाना चाहती है—
व्यक्तिगत स्वतंत्रता यानी लिबर्टी
लोकतंत्र यानी डिमॉक्रेसी
समानता यानी इक्वालिटी
समृद्धि यानी प्रॉस्पेरिटी
गरिमा पूर्ण जीवन यानी रिस्पेक्टफूल लाइफ़
भारत में व्याप्त जातिवाद और संप्रदायवाद का वर्तमान स्वरूप हमारे मिशन के लिए एक चुनौती है और इस विभेदकारी व्यवस्था को मिटाना अतिआवश्यक है। यहाँ हम जाति और धर्म को लेकर अपनी सोच को स्पष्ट करना चाहते है।
हम जानते है कि भारत कई जातियों में बँटा होने के कारण कमजोर और विभाजित रहा है, यही वजह हमारी हज़ार साला ग़ुलामी का मूल कारण रही है, अंधकार के इस दौर ने हमारे दस करोड़ पूर्वजों का बलिदान लिया है। एक भारत अनेक जातीय समूहों में बंट जाने से टूटता रहा है, परिणामस्वरूप कई छोटे और अपेक्षाकृत कमजोर समूह भी हमें पराजित करने में कामयाब हो गये। इसी दुःखद जातिव्यवस्था जिसके मूल में आदिम क़बीलाई सोच है, के चलते हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा ग़रीब है और घोर निराशा में है। सच्चाई यह है कि शेष दुनिया किसी दूसरे लोक में है और हम इक्कीसवीं सदी में भी तकलीफ़देह पिछले दौर में ही विचर रहे है। पीपल्स ग्रीन पार्टी भारत को जातिविहीन समाज में परिवर्तित करना चाहती है, यानी सबके लिए हर प्रकार के अवसर की बराबरी की कल्पना करती है।
जातियों के अस्तित्व में होने से “व्यक्ति”, जिसमें विकास की अनंत संभावना होती है, का महत्व समाप्त होता है। व्यक्ति को एक कबाइली जातिगत थैले या वर्ग में सीमित कर दिया जाता है। जातिगत राजनीतिक धड़ेबंदी और समूहगत स्वार्थ के चलते ना चाहते हुए प्रबुद्ध इंसान भी भेड़ों के समूह की तरह व्यवहार करने को मजबूर हो जाता है। इन सबके चलते पूरा भारत विभिन्न जातीय स्वार्थ समूहों में बँटा हुआ नज़र आता है। अगर इसे रोकने के लिए कोई सृजनात्मक आंदोलन नहीं खड़ा किया गया तो भारत में जातीय संघर्ष अवश्यंभावी है। पीपल्स ग्रीन पार्टी इस जातीय संघर्ष को रोकने के लिए प्रण-प्राण से प्रयासरत है और रहेगी।
सरकारी नीतियाँ जिनका आधार ही “बाँटों और राज करो” होता है के चलते आज जातियाँ आगे है और बेचारा व्यक्ति बहुत पीछे छूट गया है, स्वाभाविक है कि वर्तमान में व्यक्तिगत आज़ादी बेमानी हो कर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। जबकि मानवाधिकार चार्टर और हमारा संविधान हमें व्यक्तिगत अधिकार और स्वतंत्रता देने की गारंटी देते है।
पीपल्स ग्रीन पार्टी के रूप में हम इन आदिम जातिसमूहों को पुरातन और ग़ैर ज़रूरी परंपरा मानते हुए हर प्रकार से कमजोर करेंगे और समाज को जातिविहीन करने के लक्ष्य पर निरंतर प्रयास करेंगे। जाति को गिरोह की तरह इस्तेमाल करने की किसी को अनुमति नहीं देंगे और कथित समाज के ठेकेदार जो अपनी निजी स्वार्थ के चलते देश के भीतर इस प्रकार की गिरोह बंदी करते है और व्यक्ति, जिसमें सृजन की अनंत संभावना होती है, को आगे नहीं बढ़ने देते है, ऐसे विभाजनकारी और प्रतिगामी जातीय समूहों का समूल नाश करना हमारे मिशन का एक हिस्सा होगा।
हिंदू-मुस्लिम या अन्य धर्म-संप्रदायों को लेकर पीपल्स ग्रीन पार्टी का मानना है कि हमारे संविधान में निहित नागरिकों के हित के दृष्टिगत देश को अब “राष्ट्रधर्म” के पथ पर चलना चाहिए। संपूर्ण भारत को धार्मिक पूर्वाग्रहों से मुक्त कर ज्ञान आधारित आधुनिक समाज में परिवर्तित करना हमारे मिशन का हिस्सा होगा। अगर हम चाहते है कि भारत वैश्विक समुदाय में गर्व से खड़ा हो सके तो इसके लिए नई पीढ़ी को ज्ञान, तर्क और विज्ञान के मार्ग पर ले जाना ही होगा।
हालाँकि कि हम मानते है कि सभी देश वासियों को अपनी पूजा पद्धति को मनाने और अपने ढंग से अपने धार्मिक विश्वासों के अनुरूप ज़िंदगी जीने का अधिकार होना चाहिए किंतु शासन यानी सरकार को किसी भी धर्म या मज़हब को समर्थन या संरक्षण नहीं करना चाहिए, हम जितने बहुसंख्यकवाद के ख़िलाफ़ है उतने ही अल्पसंख्यकवाद को भी बुरा मानते है। देश की शासन व्यवस्था को सभी धर्म, संप्रदाय या मज़हब के लिए तटस्थ और निष्पक्ष होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति या समूह के धर्म, संप्रदाय या मज़हब को दूसरे के धर्म, मज़हब या संप्रदाय पर किसी भी प्रकार से प्रभावी नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति, उसका परिवार या कोई भी समूह अपनी पूजा पद्धति को अपने तरीक़े उस सीमा तक अपनाए जहां तक दूसरे के हितों का या उनकी पूजा पद्धति का अतिक्रमण नहीं हो रहा हो। अपने घर या किसी भी और कितने भी निजी परिसर में हर संप्रदाय अपने तरीक़े से ईश्वर में आस्था व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए किंतु सार्वजनिक स्थल किसी भी धर्म, संप्रदाय या मज़हब के प्रदर्शनों और क्रियाकलापों से मुक्त ही रहे तो यह राष्ट्र हित में होगा। सार्वजनिक स्थान पर माइक से पूजा-पाठ, भजन, अजान या आरती ध्वनि प्रदूषण करती है और वातावरण को नुक़सान पहुँचाती है, इसे रोक देना ही श्रेयस्कर होगा। सड़क पर आम लोगो के यातायात को अवरुद्ध कर धार्मिक या मज़हबी जुलूस, या किसी भी तरह का वीआईपी मूवमेंट इत्यादि सभी के लिए अस्वीकार्य होंगे। इसी प्रकार देश में अब किसी भी तरह का धर्मांतरण, घरवापसी और जेहाद पूरी तरह से अस्वीकार्य होगा। सरकारी टैक्स से किसी भी धार्मिक या मज़हबी स्थल के उत्थान पर रुपया खर्च करना निहायत संविधान विरोधी कार्य है।
साथ ही, भारत की सहस्राब्दियों की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्य रखना भी हमारा राष्ट्रधर्म है और हमें इस धरोहर को संरक्षित भी करना ही है। लोक संस्कृति, भाषा और इतिहास राष्ट्र के लिये मातृवृत होती है, इन्ही से राष्ट्र का जन्म होता है और इन्ही से पीढ़ियों के लिए गौरवशाली क्षण आते है। ऐसी परम्पराएँ जो अब वैश्विक मापदंडों के अनुरूप नहीं हो उन्हें समाप्त करते हुए अपनी संस्कृति और उसकी श्रेष्ठता को अगली पीढ़ी को सौंपना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
देश की आम जनता भी इस बात को भली भाँति जानती है कि करप्शन यानी भ्रष्टाचार देश की प्रगति के लिए एक दीमक की तरह कार्य कर रहा है और ग़रीबी के लिये ये खाद का काम कर रहा है। पिछले 75 सालों में हमने इसका ख़ामियाज़ा भुगता है। ग़ुलामी काल के क़ानून आज़ादी के बाद भी चलते रहे, बरसों की ग़रीबी हमारे ब्यूरोक्रेट्स के दिमाग़ से निकल नहीं सकी और सत्ता ख़ुद को स्थापित करने के लिए या व्यवस्था को ख़रीदने के लिए धन एकत्र कर रही होती है तो अधीनस्थ को भी भ्रष्ट बना देना चाहती है। कुल मिलाकर पूरे तंत्र में भ्रष्टाचार भांग की तरह घुल गया। पार्टियाँ आयी और गई, मुख्यमंत्री बने और बदले, ये गंदगी चलती ही रही!
पीपल्स ग्रीन पार्टी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस चाहती है। आटे में नमक के बराबर भी मंज़ूर नहीं!
अब सरकार को पुराने ऐसे क़ानून निरंतर बदलने होंगे जो अधिकारी या नेता को डिस्क्रीशन या डिस्क्रिमिनेशन के अधिकार देते हो। व्यवस्था में ट्रांसपेरेंसी लायी जानी चाहिए, अधिकांश कार्य को ऑनलाइन और फेसलेस कीजिए। ब्लॉकचेन को इस्तेमाल कीजिए।
अधिकारियों और सत्ता में बैठे नेताओं को लगातार मोरल एजूकेशन देनी ही होगी। किसी भी राजकीय कर्मी का सुविधा शुल्क या काम जल्द करने के नाम पर रुपया वसूलना या किसी भी रूप में भ्रष्टाचार करना पाप है। राजकीय कर्मियों को अच्छी मासिक वेतन मिलती है उन्हें अधिक लालच न करते हुए इसी सीमा में रहना होगा। यदि वे अधिक धन अर्जित करने की चाह रखते है तो उन्हें राजकीय सेवा छोड़ कर उद्यमिता में अपना भाग्य आज़माना चाहिए। हर वर्ष सभी कर्मचारी अपनी आय और जमा सम्पति को स्वयं पब्लिक डोमेन में डाल दें, स्वयं पिछले वर्ष से तुलनात्मक रिपोर्ट भी दें।
भ्रष्ट व्यक्ति या समूह पर सख़्त कार्यवाही करनी ही होगी। जाँच जल्दी होनी चाहिए। तुरंत चालान पेश हो और जल्द न्याय हो। साबित होते ही पदमुक्त कीजिये। आय से अधिक सम्पति को जनताकोष को तुरंत लौटाना ही होगा।
यदि सिस्टम, सरकार या व्यक्ति इस पर सही से कार्यवाही नहीं करेंगे तो देश, लोकतंत्र और एक भारतीय के रक्षार्थ पीजीपी का विस्सल ब्लोअर ऐसे राष्ट्रद्रोहियों पर सीधी कार्यवाही कर सकता है।
महिलाओं को लेकर भारत की क्या सोच है ये अधिक स्पष्ट होनी चाहिए। जो विचार संविधान रखता है वो अभी तक पूरी तरह से समाज समझ नहीं सका है कि देश में हर तरह से औरत और आदमी बराबर है। हर स्थान पर यानी परिवार के भीतर और बाहर, सामाजिक, आर्थिक या सांस्कृतिक हर स्थान और मोर्चे पर बिलकुल बराबर है। अब पुरानी परंपरा कैसी भी रही हो या कोई भी सामाजिक धड़ा कुछ भी सोचता हो। जाति पंचायत और समाज के ठेकेदार क़ानूनी रूप से या नैतिक रूप से किसी भी प्रकार से इसके विपरीत विचार नहीं रख सकते। आधे लोगो को शक्ति देने से और शेष आधे लोगो को पीछे रखने से हम अपने आधे लक्ष्य को ही प्राप्त कर सकेंगे जो किसी भी सूरत में हमें मंज़ूर नहीं है।
अब ये सिर्फ़ एक राजनीतिक मसला नहीं है अपितु इसके लिए लंबे सामाजिक आंदोलन की ज़रूरत है। पीपल्स ग्रीन पार्टी इस संबंध में बिलकुल ईमानदार है एवम् इस बराबरी को हर जगह, हर कागज में और हर दिल में स्थापित करने को प्रतिबद्ध है। ये भले संसद हो या विधानसभा या कोई भी सदन, कोई भी कार्यालय, परिवार की सम्पति का मामला हो हर स्थान पर महिलाओं को पुरुष के बिलकुल बराबर अवसर और बिलकुल बराबर स्थान मिलना ही चाहिए। जब तक हम इसे पाने में कामयाबी न हासिल कर सके, हमारी आज़ादी अधूरी है और हमारा मिशन भी अधूरा है।
इसी से संबंधित मसला महिला उत्पीड़न और महिला अपराध का है। इस बात को बहुत ज़ोर से सभी को बताना होगा कि महिला और पुरुष हर प्रकार से बराबर है और सभी को इस सिद्धांत को मानना होगा। बाहर से अधिक घर के भीतर हो रहे उत्पीड़न पर पूरे समुदाय को शिक्षित करना सभी का कर्तव्य है। दोनों पक्ष एक दूसरे का सम्मान करे और दूसरे का दमन न करे। परंपरा के नाम पर परिवारों में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार का मुखर विरोध किया जाना अत्यंत आवश्यक है। यह संपूर्ण मसला क़ानून से अधिक सामाजिक सोच से जुड़ा हुआ है, इस मुद्दे पर क़ानून पर्याप्त रूप से निर्मित है किंतु सामाजिक सुधार कर एक आंदोलन खड़ा किया जाना है।
इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शासन महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता पर कार्यक्रम चलाये और रोज़गार, शिक्षा और अवसर की बराबरी पर निरंतर काम करे। पीपल्स ग्रीन पार्टी इस मसले को आधारभूत स्तर पर माइक्रो मैनेजमेंट द्वारा सफल करने के लिए प्रतिबद्ध है। पार्टी का इरादा राजकीय सेवाओं में और सरकार द्वारा प्रदत्त सभी अवसरों में महिला वर्ग को आधा हिस्सा देने का है।
देश का बहुसंख्यक वर्ग ग्रामीण क्षेत्र का वासी है और किसी न किसी रूप से कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। आज़ादी के बाद ख़ास तौर से औद्योगिक विकास के दौरान या सेवा क्षेत्र के विकास के दौर में कृषि को अलाभकारी और अप्रतिष्ठापूर्ण कार्य समझ इसकी अवहेलना हुई है फिर इतनी बड़ी आबादी को कोई विकल्प भी उपलब्ध नहीं कराया गया और देश की GDP में इस बड़ी आबादी का योगदान काफ़ी कम रह जाने से इस वर्ग को भी बड़ा भारी नुक़सान हुआ है और उससे भी आगे हमारे देश को भी बड़ी हानि हो रही है।
पीपल्स ग्रीन पार्टी इस संबंध में अलग तरह की सोच रखती है और किसान आत्मनिर्भरता और उनके सशक्तिकरण पर काम करना चाहती है। पार्टी के अनुसार राजस्थान में विषम प्राकृतिक स्थिति होने के उपरांत भी कृषि और संबंधित क्षेत्र इस पर निर्भर वर्ग के लिए अत्यंत लाभप्रद हो सकते है। हम कृषि, पशुपालन, डेयरी और फ़ूड प्रोसेसिंग पर सही से काम कर चमत्कारी नतीजे हासिल कर सकते है। इन क्षेत्रों में बेहतर काम कर न केवल राज्य की GDP को तीन गुना कर सकते है अपितु राजस्व को भी ढाई गुना कर सकते है जिससे विकास के नये आयाम गठित करेंगे और राजस्थान को देश का अग्रणी राज्य बना देंगे साथ ही राज्य में विकसित राष्ट्र वाला स्तर उपलब्ध करा सकेंगे। हमारा इरादा माइक्रो इकोनॉमिक मैनेजमेंट द्वारा पूरे राज्य को एक हज़ार क्लस्टर में विभाजित कर इन सभी एक हज़ार क्लस्टर के लिए अलग अलग विकास मॉडल बनाने का है। समान प्राकृतिक संसाधनों और समान जलवायु वाले क्षेत्र से बनाये जा रहे एक क्लस्टर के आर्थिक विकास के लिए ख़ास प्लान तैयार कर उसे लागू किया जाना है। इस क्लस्टर्स को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनायेंगे। यहाँ रहने वाले किसान, महिला और युवा वर्ग के सशक्तिकरण हेतु सभी यथासंभव प्रयास करेंगे। कृषि और पशुपालन प्रोत्साहन के लिए कटिंग एज टेक्नोलॉजी की सहायता लेंगे। खाद, बीज और उर्वरक के साथ पानी बिजली, ट्रेनिंग, स्किलिंग आदि सहायता उपलब्ध होगी। एफ़पीओ और ओएफ़पीओ या सहकारी तरह से प्रोसेसिंग व मार्केटिंग प्लेस की व्यवस्था भी करेंगे। बीमा और सीड मनी सिस्टम को सही करेंगे। कुल मिलाकर कह सकते है कि जिस किसान को पिछले 75 साल में आपने क़र्ज़दार और कमजोर बना दिया उसे समर्थ और सशक्त बना देंगे। उत्पादन और GDP को हर हाल में तीन गुना करेंगे।
राज्य में पिछले लंबे अरसे से क़रीब 25 % बेरोज़गारी दर है यानी राज्य की चौथाई आबादी बेकार है और रोज़गार की तलाश में बूढ़ी होती जा रही है। निराशा और हताशा में नशे में एक पूरी पीढ़ी डूब रही है। हमारी युवा पीढ़ी का ख़ुद पर से भरोसा समाप्त होता जा रहा है। दिग्भ्रमित है और उम्मीद का कोई कारण नहीं है। आबादी का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा के अवसर से वंचित है, एक बड़ा हिस्सा नान अटेंडिंग एजूकेशन में रजिस्टर्ड है। जो डिग्री धारी है वो
राजस्थान में 18 वर्ष से 35 वर्ष यानी युवाओं की आबादी 2 करोड़ से भी अधिक है और इस उम्र समूह के 80% युवा आज बेरोज़गार है और बेकार बैठे है, अनेक युवा नशा, उधार, ऑनलाइन सट्टा और ग़ैर क़ानूनी कार्यो में उलझ गए है। सरकार ने 75 लाख युवाओं को बीस साल से सरकारी नौकरी के झाँसे में उलझा कर रखा है। पिछले दो दशक में सरकार के अदूरदर्शिता पूर्ण रवैये के चलते निराश युवा अंधकार युग में जी रहे है।
वस्तुतः देश भर में छात्र आज बिना किसी उद्देश्य के मूल्यहीन डिग्रियाँ हासिल करने की होड़ में लग कर पढ़े लिखे बेरोज़गार बनने की पाँति में जा खड़े हो रहे है। हम उनको मूल्यवान शिक्षा और दीक्षा देने का अभियान चलाने जा रहे है। विद्यालय शिक्षा के उपरांत बड़ी संख्या में नौजवानों को वोकेशनल, स्किल, अपरेंटिसशिप और एंटरप्रेन्योरशिप कार्यक्रमों के लिए तैयार किया जाना चाहिये ताकि उनको रोज़गार भी ठीक से मिल सके और इंडस्ट्री को भी बेहतर मैनपॉवर प्राप्त हो जाए।
पीपल्स ग्रीन पार्टी युवाओं को सक्षम, समर्थ और आत्मनिर्भर बनाने के लिये एक बड़ा विज़न रखती है। दुनिया के सबसे बडे युवा कार्यक्रम को तैयार किया गया है। जिसमें विश्व के सबसे बड़े इनक्युबेशन कार्यक्रम के तहत दस लाख युवाओं पर कार्य किया जाएगा यानी हर विधानसभा से क़रीब 5000 युवाओं को अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।
शुरू में अलग अलग 200 प्रकार की विधाओ से संबंधित एक हज़ार प्रशिक्षण, स्किलिंग व इनक्युबेशन केंद्र स्थापित किया जाना है। यहाँ से प्रशिक्षित युवाओं को आगे जाकर प्रस्तावित 1000 रूरल इकोनॉमिक जोन में माइक्रो एंटरप्रेन्योर या ट्रेडर, स्किल मैनपावर बन सकने का अवसर प्रदान किया जाएगा। जहां उन्हें निशुल्क इंडस्ट्रियल प्लॉट, शॉप या अन्य संसाधन उपलब्ध कराये जाएँगे। साथ ही 10 लाख रुपये तक सीड मनी, सब्सिडी और लोन सुविधा भी उपलब्ध होगी। उल्लेखनीय है कि उनके उत्पादन के विक्रय के लिए एक इनोवेटिव मार्केट आईडिया भी तैयार किया गया है। इस ट्रेनिंग पर सरकार प्रति विद्यार्थी को दो लाख रुपये तक की सहायता भी प्रदान करेगी।
उच्च शिक्षा के लिए इच्छुक ग़रीब और ज़रूरत मंद वर्ग के विद्यार्थी के लिए चार वर्ष तक एक लाख रुपये तक की राजकीय सहायता उपलब्ध होगी, इसमें सभी एस सी, एस टी, ग़रीब ओबीसी व सामान्य वर्ग के विद्यार्थी शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात जो विद्यार्थी शोध या नवाचार या उद्यमशीलता पर कार्य करना चाहते होंगे उनके लिए सरकार आवश्यक प्रबंध भी करेगी।
साथ ही सरकारी नौकरी का एक वार्षिक कैलेंडर हर वर्ष जारी होगा और बेहद व्यवस्थित और ईमानदार तरीक़े से बिना किसी फ़ीस के चयन प्रक्रिया पूर्ण कर समय बद्ध नियुक्ति प्रदान की जायेगी।
युवा विद्यार्थियों को सरकार एक लाख पेड इंटर्नशिप के अवसर प्रदान करेगी।
प्रदेश में एक-एक हज़ार खेल मैदान काम्प्लेक्स, लाइब्रेरी, फिटनेस केंद्र तथा रंगमंच व कला केंद्र स्थापित किए जाएँगे और एक लाख युवाओं को प्रोत्साहन हेतु एक लाख रुपये तक की स्कालरशिप उपलब्ध होगी।
प्रोटीन डाइट व अन्य पोषक खाद्य पर सब्सिडी मिलेगी। कंप्यूटर, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक गैजाट, स्टेशनरी, इंटरनेट डेटा और स्पोर्ट किट पर विशेष छूट होगी।